Kundalini Jagaran and Healing Shivir (Live)

Kundalini Jagaran and Healing Shivir

Kundalini is the consciousness of every creature hailed as the “Chiti Shakti” or “Adi Shakti” described in the scriptures as a serpent of white colour with two and a half coils situated in the “Mooladhar Chakra”

Kundalini lies in sleeping state from millions of life times. When a self realised master through the process of “Shakti Paat” awakens this sleeping consciousness, it starts to move upwards in the “Shushumna Nadi” to complete it’s ultimate journey of merging with the “Shiva Consciousness” situated in the “Sahastrar or Crown Chakra”.

When the Kundalini is awakened, it starts burning the accumulated karmas from past and present lives moving past the three gunas namely Tamas, Rajas and Sat ultimately making the person Gunateet or beyond the three Gunas.

कुंडलिनी जागरण एवं हीलिंग शिविर

कुंडलिनी शक्ति हर प्राणी मात्र की चेतना है जिसे “आदि शक्ति” या “चिति शक्ति” के नाम से भी जाना जाता है, हमारे शास्त्रों में इसी कुंडलिनी शक्ति को मूलाधार चक्र पर स्थित साढ़े तीन कुंडली मारे सर्प के रूप में उल्लेख किया गया है ।

यह शक्ति जन्म जन्मांतर से सोई हुए अवस्था में स्थित होती है, जब कोई सिद्ध गुरु शक्ति पात के द्वारा इस सोई हुई चेतना को जगाता है तो यह कुंडलिनी जागृत होकर सुषुम्ना मार्ग में ऊर्ध्व गति की ओर बढ़ना शुरू कर देती है और सहस्त्रार चक्र में स्थित परम शिव से लय होने की अपनी परम यात्रा की ओर बढ़ चलती है ।

जब कुंडली जागृत हो जाती है और उर्ध्व गति करती है तो यह सुषुम्ना मार्ग में स्थित जन्म जन्मांतर के संचित कर्मों को भस्म कर प्रारब्ध कर्मों से साधक को मुक्ति दिलाना शुरू कर देती है ।

सुषुम्ना नाड़ी में ऊपर बढ़ते हुए संचित कर्मों का भक्षण करते हुए कुंडलिनी शक्ति धीरे-धीरे साधक को तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण से मुक्त करने लगती है और साधक आत्मसाक्षात्कार के करीब पहुंचने पहुंचते सभी गुणों से परे या “गुणातीत” होने लगता है ।

जिस साधक की कुंडली जागृत हो चुकी है और वह आध्यात्मिक उन्नति के अपने साधना के मार्ग पर अग्रसर है धीरे-धीरे सभी सिद्धियां स्वयं उसके पीछे चल पड़ती हैं । यह सिद्धियां उस साधक को उसके जीवन पर जीवन की तमाम परिस्थितियों पर नियंत्रण करने की क्षमता प्रदान करती हैं बशर्ते वह साधक इन सिद्धियों का दुरुपयोग न करे । जैसे ही साधक इन सिद्धियों का दुरुपयोग करता है यह सिद्धियां उसका साथ छोड़कर चली जाती हैं ।

जिन साधक की कुंडलिनी शक्ति या आदिशक्ति सहस्रार में स्थित उस परम चेतना या उस परम शिव से एकाकार कर चुकी है उस साधक को सिद्ध कहते हैं जिसने आत्म साक्षात्कार कर लिया और ऐसा व्यक्ति सर्वव्यापी हो जाता है ।

कुंडलिनी जागरण के अलावा इस शिविर में हीलिंग का भी एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा जिसमें लोगों को यह सिखाया जाएगा की कैसे वह अपने जीवन के विभिन्न आयामों को अपने अनुसार बना सकते हैं और अपने जीवन को और बेहतर कर सकते हैं ।

यह अनूठा शिविर 16 और 17 अप्रैल 2022 को आयोजित होगा

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